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तो ये रही Bashir Badr साहब की कुछ यादगार उर्दू शायरी

Bashir Badr साहब की मशहूर शायरियां

Bashir Badr साहब की मशहूर शायरियां। उर्दू अदब की दुनिया में बशीर बद्र साहब का नाम हमेशा इज्जत और मोहब्बत से लिया जाएगा। उनकी शायरी में दर्द भी था, प्यार भी था और जिंदगी की सच्चाइयों का खूबसूरत एहसास भी। आसान शब्दों में गहरी बात कहने का जो हुनर उनके पास था, वही उन्हें बाकी शायरों से अलग बनाता है।

आज भी उनके लिखे हुए शेर लोगों के दिलों को छू जाते हैं। मोहब्बत, जुदाई, रिश्ते और इंसानियत पर लिखी उनकी ग़ज़लें हर दौर में पसंद की जाती रहेंगी।

तो ये रही Bashir Badr साहब की मशहूर शायरियां

उजाले अपनी यादों के हमारे साथ रहने दो,
ना जाने किस गली में जिंदगी की शाम हो जाए।

कुछ तो मजबूरियां रही होंगी,
यूँ कोई बेवफा नहीं होता।

लोग टूट जाते हैं एक घर बनाने में,
तुम तरस नहीं खाते बस्तियां जलाने में।

दुश्मनी जम कर करो लेकिन ये गुंजाइश रहे,
जब कभी हम दोस्त हो जाएं तो शर्मिंदा न हों।

कोई हाथ भी न मिलाएगा जो गले मिलोगे तपाक से,
ये नए मिज़ाज का शहर है जरा फासले से मिला करो।

मोहब्बतों में दिखावे की दोस्ती न मिला,
अगर गले नहीं मिलता तो हाथ भी न मिला।

अजीब लोग हैं मेरी तलाश में मुझको,
वहाँ पर ढूंढ रहे हैं जहाँ नहीं हूँ मैं।

दिल की बस्ती पुरानी दिल्ली है,
जो भी गुज़रा है उसने लूटा है।

घर से मस्जिद है बहुत दूर चलो यूँ कर लें,
किसी रोते हुए बच्चे को हँसाया जाए।

मैं चुप रहा तो और गलतफहमियां बढ़ीं,
वो भी सुना है उसने जो मैंने कहा नहीं।

पत्थर मुझे कहता है मेरा चाहने वाला,
मैं मोम हूँ उसने मुझे छूकर नहीं देखा।

कभी तो फूल खिलेंगे किसी बहार के साथ,
यकीन रखना मेरा भी हिसाब होगा।

ये चिराग कोई चिराग हैं,
न जला हुआ न बुझा हुआ।

उसकी आँखों में उतर जाने को जी चाहता है,
शाम होती है तो घर जाने को जी चाहता है।

चल साथ कि हसरत दिल-ए-मरहूम से निकले,
आशिक का जनाजा है ज़रा धूम से निकले।

हजारों दर्द छुपे हैं हँसी के पीछे मगर,
मैं मुस्कुरा के जमाने को धोखा देता हूँ।

जिसे भी देखिए वो अपने आप में गुम है,
ज़ुबां मिली है मगर हमज़ुबां नहीं मिलता।

यही बहुत है कि तुमने पलट के देख लिया,
ये लुत्फ भी मेरी उम्मीद से ज्यादा है।

वो बड़ा रहीस सही दिल का अमीर नहीं,
हम गरीब सही लेकिन जमीर रखते हैं।

कभी यूँ भी आ मेरी आँख में कि मेरी नजर को खबर न हो,
मुझे एक रात नवाज़ दे मगर उसके बाद सहर न हो।

सफर में धूप तो होगी जो चल सको तो चलो,
सभी हैं भीड़ में तुम भी निकल सको तो चलो।

हम भी दरिया हैं हमें अपना हुनर मालूम है,
जिस तरफ भी चल पड़ेंगे रास्ता हो जाएगा।

कितनी सच्चाई से मुझसे जिंदगी ने कह दिया,
तू नहीं मेरा तो कोई दूसरा हो जाएगा।

तुम मोहब्बत को खेल कहते हो,
हमने बर्बाद जिंदगी देखी।

बड़ी हिम्मत से सच बोलो मगर ये याद रखना,
बहुत लोग टूट जाते हैं एक सच्चाई के बाद।

नहीं रहे मशहूर शायर बशीर बद्र साहब, 91 वर्ष की उम्र में ली आखिरी सांस

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