May 30, 2026
Jabalpur Bargi Dam

मध्य प्रदेश के जबलपुर में नर्मदा नदी पर बरगी बांध बना हुआ है , जहां देश के अलग-अलग हिस्सों से लोग Jabalpur Bargi Dam देखने पहुंचते हैं ऐसे ही 30 अप्रैल 2026 शाम की यह बात है। एक क्रूज पर बहुत सारे लोग बैठे थे इन यादों को सहेजने के लिए कुछ लोग अपने फोन से वीडियो बना रहे है कुछ फोटो खींच रहे है तो कोई आपस में एक दूसरे से बात कर रहा है, कोई बता रहा है कि देखो कितना सुंदर नजारा है ऐसे ही बातचीत करते-करते अचानक से तेज तूफान आ जाता है और जैसे यह तूफान आता है यह क्रूज तेजी से हिलने लगता है. जब यह क्रूज हिल रहा था तभी इसमें थोड़ा-थोड़ा पानी आने लगता है। जब पानी आने लगा तभी क्रूज के अंदर बैठे हुए लोग घबरा जाते हैं , इसी बीच एक यात्री जिनकी उम्र लगभग 40 वर्ष होगी, उनका एक बेटा जिसकी उम्र लगभग 4 साल के आसपास थी बच्चे ने अपनी मां से कहा मां मुझे बहुत ज्यादा डर लग रहा है , तभी मां ने कहा मेरे होते तुम्हे डरने की कोई जरूरत नहीं है . मां ने अपने बच्चे को सीने से लगाया और साथ ही जब भगदड़ हो रही है, शोर हो रहा हैं, लोग डर रहे हैं तभी एक दूसरे को लाइफ जैकेट फेंक फेंक कर दे रहे थे . लोग एक दूसरे को लाइफ जैकेट पहना रहे थे , ताकि यदि कोई पानी में गिरता है तो उस लाइफ जैकेट की वजह से कोई डूबेगा नहीं ऐसे ही उस मां ने अपने बच्चे को सीने से लगाकर लाइफ जैकेट को ऐसे पहना कि बच्चा भी इस एक जैकेट में कबर हो गया , मतलब मां बेटे दोनों एक ही लाइफ जैकेट में प्रवेश पा गए , मां ने अपने बच्चे को बहोत कस के पकड़ लिया । लेकिन कुदरत को कुछ और ही मंजूर था मां और बेटा दोनों इस हादसे में बच नहीं पाते है . जब इन्हें रेस्क्यू किया जा रहा था तो बच्चा अपनी मां के सीने से वैसे ही लिपटा था जैसे उस मां ने उसे बांधा था. इस तस्वीर को किसी ने अपने कैमरे में कैद कर लिया और सोशल मीडिया पर पोस्ट कर दिया . देखते ही देखते ये फोटो न केवल उस प्रदेश में बल्कि पूरे देश में वायरल होंने लगता है. इस फोटो को देखने के बाद हर कोई इस कहानी को जानने में जुट जाता है.

Jabalpur Bargi Dam

मध्य प्रदेश के जबलपुर जिले से लगभग 40 किलोमीटर दूर Jabalpur Bargi Dam है और बरगी डैम के पास में ही एक पुल का निर्माण हो रहा था इस निर्माण में लगभग 35 मजदूर काम पर लगे हुए थे , इन 35 मजदूरों को रोक दिया जाता है , 30 अप्रैल 2026 की शाम लगभग 6 बजे के आसपास का वक्त हो रहा था , कहा जाता है कुछ देर काम रोक दो क्योंकि बहुत तेज हवाएं चल रही है तूफान आने वाला है हो सकता है बारिश आ जाए जो भी मैटेरियल तैयार करोगे कहीं वो खराब ना हो जाए जैसे मजदूरों को रोका जाता है मजदूर रुक जाते हैं रुकने के बाद वो जहां-तहां बैठ जाते हैं कोई आपस में बातचीत कर रहा था तो कोई जमीन पर लेट जाता है कोई मोबाइल निकाल कर वीडियो बनाना शुरू कर देता है. ऐसे ही एक मजदूर की नजर पड़ती है Jabalpur Bargi Dam में फंसे क्रूज पर, क्रूज कुछ ज्यादा हिल रहा था तभी उस मजदूर ने शोर मचाना शुरू कर दिया की देखो डैम के अंदर जो क्रूज है लगता है वह डूब रहा है. तभी मजदूर समझ जाते है और जितने भी मजदूर थे उनमें से ज्यादातर को तैरना आता था उन्होंने देरी न करते हुए डैम में छलांग लगा दी , वो तैरते हुए उस क्रूज तक पहुंच जाते है  लेकिन तब तक वह क्रूज डूब चुका होता है , लेकिन उन मजदूरों ने हिम्मत नहीं हारी और उन मजदूरों ने लगभग 16 लोगों को बाहर निकाला , पश्चिम बंगाल का रहने वाला एक रमजान नाम का व्यक्ति था जिसने 6 लोगों को Jabalpur Bargi Dam से बाहर निकाल बाहर निकालने के बाद पता चलता है कि उसमें से 4 लोग तो जिंदा थे लेकिन 2 लोग मर चुके थे , ऐसे भी विहार का रहने वाला राजकुमार, गोरखपुर का रहने वाला शिवनाथ कई लोगो कि जान बचाते है. वे कहते हैं जब तक क्रूज के पास पहुंचे तब तक क्रूज डूब चुका था लेकिन मजदूरों ने अपने हिम्मत का परिचय देते हुए बिना किसी सुख सुविधाओं के उन्होंने Jabalpur Bargi Dam में काफी लोगों की जाने बचाई।

जो लोग बच कर आए थे Jabalpur Bargi Dam से वो कहानी बताना शुरू करते हैं की क्रूज में लगभग 43 लोग सवार थे जिसमें क्रू मेंबर भी शामिल थे, वह बताते हैं कि लगभग 5:00 बजे हम लोग क्रूज में बैठे थे। वह बताते हैं की हम लोग इस सुंदर दृश्य का अनुभव कर रहे थे. अपने फोन में वीडियो बना रहे थे फोटो खींच रहे थे और न जाने कब तूफान आ जाता है और  क्रूज में पानी आने लगता है , सब लोग डर जाते है लेकिन तब तक किसी ने लाइफ जैकेट नहीं पहना था , क्रूज का पायलट जिसका नाम महेश पटेल है एक खतरे का सिग्नल देता है उसने लोगों को बताया कि तूफान बहुत तेज है सब लोग अपना अपना लाइफ जैकेट पहन ले , अब तक लाइफ जैकेट एकदम शील्ड थी बंद थी. इसके पहले ना किसी ने लाइफ जैकेट दी और ना ही किसी ने पहनी थी खतरे का सिग्नल मिलते ही यात्रियों में भगदड़ सी मच जाती है सब लोग जैसे तैसे लाइफ जैकेट पहनते हैं। लेकिन तब तक देर हो चुकी होती है तूफान की रफ्तार लगभग 74 km/h हो चुकी होती है. Jabalpur Bargi Dam में समुद्र के जैसे लहरें उठ रही थी और देखते ही देखते कुछ ही पलों में पूरा क्रूज डूब जाता है जिसमें से लगभग 13 लोगों की मौत हो जाती है और देखते ही देखते नर्मदा नदी पर बना जबलपुर बरगी (Jabalpur Bargi Dam ) डैम पूरे देश में चर्चा का विषय बन जाता है

Jabalpur Bargi Dam

Jabalpur Bargi Dam मे क्रूज के डूबने के बडे करण

Jabalpur Bargi Dam में क्रूज डूबने का सबसे बड़ा करण यह भी है की इतना बड़ा पर्यटक स्थल होने के बाद भी उस बांध पर आज तक कोई weather Station नहीं बनाया गया. जिससे क्रूज पायलेट्स को मौसम की सटीक जानकारी मिल सके. दूसरा सबसे बड़ा कारण यह है की क्रूज लगभग 20 साल पुराना था क्रूज चलने के मापदंड बस नाम मात्र ही बचे थे. क्रूज का पायलट आठवीं पास है जिसके पास ना कोई टेक्निकल डिग्री है ना ही क्रूज को चलाने का कोई लाइसेंस है , वह क्रूज को चलाने में सक्षम था पर इस तरह की विषम परिस्थितियों से बचने का कोई विशेष निपुणता नहीं थी. यात्रियों ने यह भी बताया की तूफान आने के बाद वह क्रूज को और आगे ले जा रहा था, हालांकि उसने क्रूज के डूबने और लोगों को बचाने की पूरी कोशिश की थीं।

Jabalpur Bargi Dam कब बना ?

Jabalpur Bargi Dam का निर्माण 1974 से शुरू हुआ था और यह 1988 से 1990 के बीच बनकर पूरा तैयार हुआ इसे बनाने का उद्देश्य सिंचाई बिजली उत्पादन और पर्यटन का है

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